*टैक्स का असमान बोझ:क्या वेतनभोगी वर्ग की कीमत पर फल-फूल रहे हैं अन्य क्षेत्र?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*टैक्स का असमान बोझ:क्या वेतनभोगी वर्ग की कीमत पर फल-फूल रहे हैं अन्य क्षेत्र?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई रिपोर्ट स्पर्श देसाई) यहां दी गई इन्फोग्राफिक इमेज का मुख्य उद्देश्य भारत की वर्तमान कर व्यवस्था (Tax Structure) की विसंगतियों और विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले कर के बोझ की तुलना करना है। यह दिखाता है कि कैसे एक वेतनभोगी यानि सैलरी पाने वाले (Salaried Person) सबसे अधिक प्रतिशत में टैक्स देते है। जबकि अन्य बड़े कमाई वाले क्षेत्रों को भारी कर छूट मिलती है। इन्फोग्राफिक का सटीक विश्लेषण (Data Breakdown) देखें तो यहां दी गई इमेज में अलग-अलग आय स्रोतों और उन पर लगने वाले आयकर (Income Tax) की तुलना की गई है।
~वेतनभोगी वर्ग (Salaried Employee):
आय: 1 करोड़ रुपये। आयकर:30 लाख रुपये (30%)
इसका निष्कर्ष देखें तो देश में सबसे ईमानदार और सबसे ज्यादा दर पर टैक्स देने वाला वर्ग नौकरीपेशा लोग हैं।
~व्यावसायिक आय (Business Income):
आय: 20 करोड़ रुपये,आयकर:80 लाख रुपये (4%)
इसका निष्कर्ष देखें तो कॉरपोरेट छूट,डिप्रिसिएशन, और विभिन्न कानूनी लूपहोल्स (Loopholes) के कारण व्यवसायों का प्रभावी टैक्स प्रतिशत बहुत कम हो जाता है। (नोट: इमेज में ''रुपये'' शब्द एक टाइपो या एडिटेड हिस्सा प्रतीत होता है।
~ कृषि आय (Agricultural Income):आय:40 करोड़ रुपये,आयकर:0 (0%) इसका निष्कर्ष देखें तो भारतीय कानून के तहत कृषि से होने वाली आय पूरी तरह टैक्स-फ्री है हालांकि इसका फायदा गरीब किसानों को मिलना चाहिए लेकिन बड़े कॉरपोरेट और अमीर लोग भी इसका लाभ उठाते हैं।
~राजनीतिक दलों की आय (Political Parties Income):आय:7,000 करोड़ रुपये,आयकर: 0 (0%) इसका निष्कर्ष देखें तो राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और आय को आयकर अधिनियम की धारा 13A के तहत छूट प्राप्त है।
~आईपीएल (IPL/BCCI की आय):आय: 12,000 करोड़ रुपये,आयकर: 0 (0%) इसका निष्कर्ष देखें तो बीसीसीआई (BCCI) को एक ''चेरिटेबल ट्रस्ट'' के रूप में प्रमोट किए जाने के कारण इसके बड़े हिस्से पर टैक्स छूट मिलती रही है (यद्यपि इस पर कानूनी विवाद चलते रहते हैं)।अब मुख्य निष्कर्ष (बॉटम लाइन) देखें तो इमेज के अंत में लिखा है। "और फिर हम पूछते हैं कि भारत का 'प्रतिभा पलायन' (Brain Drain) कब रुकेगा?" यानि अत्यधिक टैक्स के बोझ के कारण देश का पढ़ा-लिखा युवा और प्रोफेशनल्स विदेश पलायन कर रहे हैं। यहां टैक्स का असमान बोझ दिखाई दी रही है क्या वेतनभोगी वर्ग की कीमत पर फल-फूल रहे हैं अन्य क्षेत्र? सोशल मीडिया पर वायरल यह इन्फोग्राफिक भारत में ''ब्रेन ड्रेन'' (प्रतिभा पलायन) और कर व्यवस्था की गहरी विसंगतियों को भी उजागर करता है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर यह इन्फोग्राफिक तेजी से वायरल हो रहा है। जो भारत की कर व्यवस्था (Tax System) के एक कड़वे सच को बयां करता है। यह तस्वीर सीधे तौर पर सवाल उठाती है कि देश का पेट भरने और उसे आर्थिक रफ्तार देने का असली बोझ किसके कंधों पर है? और क्यों देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं (Professionals) भारत छोड़कर विदेशों का रुख कर रही हैं। मध्यवर्ग और नौकरीपेशा पर ''टैक्स'' का सबसे भारी प्रहार किया जा रहा है?वायरल डेटा के मुताबिक अगर एक वेतनभोगी (Salaried) व्यक्ति साल में 1 करोड़ रुपये कमाता है तो उसे सीधे तौर पर 30% यानी करीब 30 लाख रुपये का आयकर देना पड़ता है। यह वर्ग न तो अपनी मर्जी से टैक्स चोरी कर सकता है क्योंकि टैक्स सोर्स पर ही यानी TDS के रूप में कट जाता है और न ही इसे बड़े बिजनेसमैन की तरह ''बिजनेस खर्च'' दिखाकर छूट मिलती है। इसके विपरीत 20 करोड़ रुपये कमाने वाले बड़े व्यावसायिक घरानों का प्रभावी टैक्स विभिन्न सरकारी छूटों और सीए (CA) की चतुराई के कारण महज 4%(80 लाख) के आसपास सिमट कर रह जाता है। नीतिगत छूट देखें तो कृषि,राजनीति और खेल इन्फोग्राफिक के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश में कृषि आय के नाम पर 40 करोड़ रुपये कमाने वालों पर 0% टैक्स है। राजनीतिक दलों की 7,000 करोड़ रुपये की विशालकाय आय पर 0% टैक्स है। दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग आईपीएल (IPL)और अरबों रुपये का टर्नओवर रखने वाले खेल संघों की 12,000 करोड़ रुपये की आय पर भी 0% टैक्स का दावा किया गया है। यद्यपि कृषि और खेल को बढ़ावा देने के लिए कानूनन ये छूट दी गई हैं लेकिन आज के दौर में यह बहस का विषय बन चुका है कि क्या इतनी मोटी कमाई करने वाले सुपर-रिच (Super-Rich) लोगों और संस्थाओं को टैक्स के दायरे से बाहर रखना जायज है? ''प्रतिभा पलायन'' (Brain Drain) का मुख्य कारण देखें तो इन्फोग्राफिक के अंत में एक बेहद गंभीर सवाल पूछा गया है। "भारत का ''प्रतिभा पलायन'' कब रुकेगा?"जब देश का डॉक्टर,इंजीनियर, वैज्ञानिक और टॉप कॉर्पोरेट एम्प्लोयी अपनी मेहनत की कमाई का एक-तिहाई हिस्सा टैक्स के रूप में दे देता है और बदले में उसे बुनियादी सुविधाएं (सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा) भी वैसी नहीं मिलतीं जैसी विदेशों में मिलती हैं तो उसका निराश होना स्वाभाविक है। टैक्स का यह असमान वितरण ही देश के ''ब्रेन ड्रेन'' की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। यहां दी गई वायरल तस्वीर केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि देश के नीति-निर्माताओं के लिए एक वेक-अप कॉल (चेतावनी) है। यदि देश के मध्यम और उच्च-मध्यम नौकरीपेशा वर्ग को टैक्स से थोड़ी राहत नहीं दी गई और अन्य कमर्शियल क्षेत्रों को टैक्स के दायरे में नहीं लाया गया तो भारत की बेहतरीन प्रतिभाओं को देश में रोके रखना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। (Photos Courtesy Social media)
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