*बड़ी साज़िश:अमेरिका के गैस स्टेशनों पर ईरानी हैकर्स का जोरदार साइबर अटैक,अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*बड़ी साज़िश:अमेरिका के गैस स्टेशनों पर ईरानी हैकर्स का जोरदार साइबर अटैक,अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई) कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक शक है कि ईरानी हैकर्स ने US गैस स्टेशन फ्यूल सिस्टम को टारगेट किया है। शुक्रवार 15मई को "न्यूज़ मैक्स वायर्स" के हवाले से यह खबर आई है कि "न्यूज़वीक"में छपी CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान से जुड़े माने जा रहे हैकर्स ने पूरे अमेरिका में गैस स्टेशनों पर इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटराइज़्ड फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम में सेंध लगाई है। CNN ने बताया कि संदिग्ध हमलों में "ऑटोमैटिक टैंक गेज" सिस्टम शामिल थे। जिन्हें ATGs के नाम से जाना जाता है। जो अंडरग्राउंड गैस स्टेशन टैंकों में फ्यूल लेवल और लीक का पता लगाते हैं। U.S.अधिकारियों ने CNN को बताया कि कुछ सिस्टम बिना पासवर्ड प्रोटेक्शन के ऑनलाइन एक्सपोज़ हो गए थे। जिससे कुछ मामलों में घुसपैठियों को डिजिटल रीडिंग और सिस्टम डिस्प्ले में हेरफेर करने का मौका मिला है। अधिकारियों ने CNN को बताया कि जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि हैकर्स ने असली फ्यूल सप्लाई में बदलाव किया लेकिन चेतावनी दी कि हेरफेर की गई रीडिंग लीक को छिपा सकती है या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है। CNN ने बताया कि फेडरल जांचकर्ताओं को शक है कि घुसपैठ के पीछे ईरान से जुड़े लोग थे हालांकि अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से इस गतिविधि के लिए किसी खास ईरानी सरकारी संस्था को जिम्मेदार नहीं ठहराया था। रिपोर्ट किए गए ब्रीच U.S.की सालों से दी जा रही चेतावनियों में शामिल हैं कि ईरान ने दुनिया के सबसे आक्रामक सरकारी साइबर प्रोग्राम में से एक बनाया है। जो अक्सर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम,फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क को टारगेट करता है। U.S.जस्टिस डिपार्टमेंट ने साल 2016 में घोषणा की थी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े सात ईरानी हैकर्स पर साल 2011 और साल 2013 के बीच दर्जनों अमेरिकी बैंकों को टारगेट करने वाले साइबर अटैक के लिए आरोप लगाए गए थे। फेडरल प्रॉसिक्यूटर ने कहा कि इसी ग्रुप ने न्यूयॉर्क के राई ब्रुक में बोमन एवेन्यू डैम कंट्रोल सिस्टम में भी घुसपैठ की थी। जिसे अधिकारियों ने U.S. इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर में ईरान की पहली ज्ञात घुसपैठ में से एक बताया। साइबर सिक्योरिटी फर्म ड्रैगोस ने साल 2019 में चेतावनी दी थी कि ईरानी हैकिंग ग्रुप यूटिलिटीज,तेल सुविधाओं,पाइपलाइनों और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में इस्तेमाल होने वाले ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिस्टम पर तेजी से फोकस कर रहे थे। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी और FBI ने कई सालों में जॉइंट एडवाइजरी जारी की थी। जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ईरानी हैकर्स रेगुलर तौर पर इंटरनेट से सीधे जुड़े खराब सिक्योरिटी वाले इंडस्ट्रियल कंट्रोल डिवाइस को स्कैन करते हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म मैंडिएंट ने साल 2022 में बताया था कि ईरान सरकार से जुड़े हैकिंग ग्रुप्स ने रैंसमवेयर,नुकसान पहुंचाने वाले मैलवेयर और क्रेडेंशियल चोरी कैंपेन का इस्तेमाल करके U.S. के ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर ऑर्गनाइज़ेशन को तेज़ी से टारगेट किया था। ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने साल 2023 के आखिर में कहा था कि IRGC से जुड़े हैकर्स ने यूनिट्रॉनिक्स के बनाए इंटरनेट से जुड़े इंडस्ट्रियल डिवाइस का इस्तेमाल करके पानी की यूटिलिटीज़ और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर्स को टारगेट किया था। उस समय फेडरल एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि ईरानी एक्टर्स ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिस्टम में डिफ़ॉल्ट पासवर्ड और कमज़ोर साइबर सिक्योरिटी प्रोटेक्शन का फ़ायदा उठा रहे थे। साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी ने बार-बार चेतावनी दी है कि पूरे यूनाइटेड स्टेट्स में कई फ्यूल, पानी और यूटिलिटी सिस्टम अभी भी कमज़ोर हैं क्योंकि ऑपरेटर्स पुराने सॉफ्टवेयर और कमज़ोर नेटवर्क प्रोटेक्शन वाले पुराने इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट का इस्तेमाल करते रहते हैं। ईरान से जुड़े साइबर ऑपरेशन्स ने मिडिल ईस्ट में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बार-बार टारगेट किया है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स और पश्चिमी अधिकारियों ने साल 2012 के शमून मैलवेयर अटैक के लिए ईरानी एक्टर्स को ज़िम्मेदार ठहराया था ।जिसने दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक सऊदी अरामको के लगभग 30,000 कंप्यूटरों से डेटा मिटा दिया था। सऊदी अधिकारियों ने बाद में शमून हमले को ग्लोबल एनर्जी सेक्टर के खिलाफ अब तक किए गए सबसे खतरनाक साइबर हमलों में से एक बताया। ईरान ने पश्चिमी सरकारों और साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स द्वारा बताए गए कई साइबर हमलों में शामिल होने से इनकार किया है। ईरान,इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच हाल ही में घुसपैठ की ये खबरें आई हैं। जिसमें अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि तेहरान मिलिट्री या इकोनॉमिक के जवाब में साइबर हमलों का इस्तेमाल कर सकता है।
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