*ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन:व्यापार और ऊर्जा पर सहमति के बीच ताइवान पर चीन की 'कड़ी चेतावनी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन:व्यापार और ऊर्जा पर सहमति के बीच ताइवान पर चीन की 'कड़ी चेतावनी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 



(मुंबई रिपोर्ट स्पर्श देसाई) चाइना में ट्रंप- जिनपिंग शी शिखर सम्मेलन के दौरान व्यापार और ऊर्जा पर सहमति बनी उसीके बीच ताइवान को लेकर चीन ने'कड़ी चेतावनी दी। इस में ताइवान एक अहम मुद्दा है क्योंकि यह सबसे संवेदनशील नस हैं । शिखर सम्मेलन की भव्यता के बावजूद ताइवान पर शी जिनपिंग की "खतरनाक जगह" वाली चेतावनी यह दर्शाती है कि चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा। यह ट्रंप के लिए एक कड़ा संदेश है कि व्यापारिक रियायतें रणनीतिक हितों (Strategic Interests) पर हावी नहीं हो सकतीं। आर्थिक मजबूरी बनाम घरेलू दबाव को लेकर ट्रंप के लिए यह दौरा केवल कूटनीति नहीं बल्कि घरेलू राजनीति (मिडटर्म चुनाव) को साधने का जरिया है। रेयर अर्थ्स की सप्लाई और व्यापार घाटे को कम करना उनकी प्राथमिकता है। जबकि शी जिनपिंग मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिकी ऊर्जा (तेल) पर नजर गड़ाए हुए हैं। ईरान और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के मद्देनजर होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) को खोलने पर सहमति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात है। यह दिखाता है कि जब साझा आर्थिक संकट,ईंधन की बढ़ती कीमतें सामने हों तो दो प्रतिद्वंद्वी भी मेज पर बैठ सकते हैं। सॉफ्ट पावर और प्रतीकात्मकता जाने तो''टेंपल ऑफ हेवन'' और ''ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल'' जैसे स्थानों का चयन यह दिखाता है कि चीन अपनी सांस्कृतिक भव्यता के जरिए अमेरिका को यह याद दिलाना चाहता है कि वह अब एक बराबर की शक्ति है। यह शिखर सम्मेलन एक "नाजुक शांति" की तरह है। जहाँ एक तरफ बोइंग के बड़े ऑर्डर और तेल व्यापार रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ताइवान का मुद्दा एक ऐसे बारूद की तरह है जो किसी भी समय इस कूटनीतिक मेहनत को नष्ट कर सकता है। ट्रंप की 'बिज़नेस डील' अप्रोच और शी की 'रेड लाइन' पॉलिसी के बीच का यह संघर्ष आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेगा। ताइवान की चेतावनी के बाद ट्रंप, जिनपिंग शी के बीच दूसरे दिन की बातचीत के बारे में जाने तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 15 मई शुक्रवार को मिलने वाले हैं। दो दिन का राजकीय दौरा खत्म करने के लिए जिसमें स्वागत व मनोरंजन धूमधाम,बिज़नेस डील,ईरान पर प्रोग्रेस तो शामिल रही लेकिन शी की तरफ से यह भी चेतावनी दी गई कि ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभालने से अमेरिका-चीन के रिश्ते "बहुत खतरनाक जगह" पर जा सकते हैं। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2017 में चीन गए थे। जो अमेरिका का मुख्य स्ट्रेटेजिक और आर्थिक दुश्मन है। यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन का दौरा किया है। वे अहम मिडटर्म चुनावों से पहले अपनी अप्रूवल रेटिंग में आई गिरावट को ठीक करने के लिए ठोस नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं। ट्रंप के अमेरिका वापस जाने से पहले दोनों नेताओं के बीच चाय और लंच का कार्यक्रम है।


इस समिट का मकसद अक्टूबर में नेताओं की पिछली मुलाकात के समय हुए नाजुक ट्रेड समझौते को बनाए रखना है।  ट्रंप ने चीनी सामानों पर ट्रिपल-डिजिट टैरिफ रोक दिए और शी ज़रूरी रेयर अर्थ्स की ग्लोबल सप्लाई को रोकने से पीछे हट गए। अपने हालिया दौरे में ट्रंप से यह भी उम्मीद की जा रही थी कि वह चीन से ईरान को वाशिंगटन के साथ एक समझौता करने के लिए राजी करे।  जिससे युद्ध समाप्त हो सके । जिसने अमेरिकी मतदाताओं और विधायकों को विभाजित कर दिया है
लेकिन उन्होंने बीजिंग की यात्रा कुछ आलोचकों के अनुसार कमजोर हाथ के साथ की है क्योंकि अदालतों ने उनकी टैरिफ नीतियों को सीमित कर दिया है और ईरान युद्ध से प्रेरित ईंधन,उर्वरक और अधिक की कीमतों में बढ़ोतरी ने घर में राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। गुरुवार की वार्ता के एक संक्षिप्त अमेरिकी सारांश में व्हाइट हाउस ने नेताओं की ईरान तट से दूर होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने की साझा इच्छा को उजागर किया। जिसके माध्यम से सामान्य समय में तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति का पांचवां हिस्सा यात्रा करता है और मध्य पूर्व की आपूर्ति पर चीन की निर्भरता को कम करने के लिए अमेरिकी तेल खरीदने में शी की स्पष्ट रुचि है। 


सख्त चेतावनी ताइवान पर शी की टिप्पणी, लोकतांत्रिक रूप से शासित द्वीप बीजिंग जिस पर अपना दावा करता है। एक तीखी, अगर अभूतपूर्व नहीं तो चेतावनी का प्रतिनिधित्व करती है। एक शिखर सम्मेलन के दौरान जो अन्यथा मैत्रीपूर्ण और आरामदायक दिखाई दिया। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे एक बंद दरवाजे की बैठक में आए जो दो घंटे से अधिक समय तक चली। ताइवान जो चीन के तट से केवल 50 मील (80 किमी) दूर है। लंबे समय से अमेरिका-चीन संबंधों में एक फ्लैशपॉइंट रहा है। बीजिंग ने द्वीप पर नियंत्रण पाने के लिए सैन्य बल के उपयोग से इनकार करने से इनकार कर दिया है और संयुक्त राज्य अमेरिका कानून द्वारा ताइपे को अपना बचाव करने के साधन प्रदान करने के लिए बाध्य है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जो चीन में ट्रंप के साथ हैं। उन्होंने  एनबीसी न्यूज़ को बताया कि ताइवान पर चर्चा की गई। रुबियो ने आगे कहा कि ताइवान के मुद्दे पर U.S. की पॉलिसी आज से नहीं बदली है। ट्रंप जो बड़े मौकों का मज़ा लेते हैं । पब्लिक इवेंट में अपने स्टाइल में दिखे।
उन्होंने एक रिपोर्टर के चिल्लाकर पूछे गए सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या नेताओं ने "टेंपल ऑफ़ हेवन UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट" पर चाइना के राष्ट्रपति शी के साथ फोटो खिंचवाते समय ताइवान पर बात की थी। बीजिंग के "ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल"  में एक सेरेमनी के बाद जिसमें ऑनर गार्ड और फूल और झंडे लहराते बच्चों की भीड़ शामिल थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि यह अब तक की सबसे बड़ी समिट हो सकती है। एक शानदार स्टेट बैंक्वेट में राष्ट्रपति शी ने चीन-U.S. रिश्ते को दुनिया में सबसे ज़रूरी बताया और कहा कि हमें इसे काम करना चाहिए और इसे कभी खराब नहीं करना चाहिए। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि शी ने ट्रंप को बताया था कि बुधवार को U.S. और चीनी ट्रेड टीमों के बीच तैयारी के लिए हुई बातचीत "बैलेंस्ड और पॉजिटिव नतीजों" पर पहुंची थी।  अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट जिन्होंने उन वार्ताओं का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भविष्य के द्विपक्षीय व्यापार और निवेश का समर्थन करने के लिए तंत्र स्थापित करने और बोइंग विमान के लिए बड़े चीनी ऑर्डरों के बारे में घोषणा की प्रगति की उम्मीद है। यह रिपोर्ट वर्तमान भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिदृश्य में अमेरिका और चीन के बीच के जटिल संबंधों का एक सटीक खाका खींचती है। ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच 'सहयोग और संघर्ष' के विरोधाभास को स्पष्ट करती है। (Photos Courtesy Social media)


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