*ब्रिक्स समिट 2026: भारत की कूटनीतिक कमान और 'ग्लोबल साउथ' का नया रोडमैप*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*ब्रिक्स समिट 2026: भारत की कूटनीतिक कमान और 'ग्लोबल साउथ' का नया रोडमैप*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई



(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)ब्रिक्स (BRICS) समिट को लेकर अक्सर तारीखों और आयोजनों में थोड़ा असमंजस हो जाता है क्योंकि मुख्य नेताओं का शिखर सम्मेलन (Leaders' Summit) और मंत्रियों व शेरपाओं की बैठकें अलग-अलग समय पर होती हैं चूंकि भारत के पास इस साल (2026) ब्रिक्स की अध्यक्षता है। वर्तमान स्थिति को विस्तार से देखें तो मुख्य ब्रिक्स लीडर्स समिट (18वां शिखर सम्मेलन) अभी आयोजित नहीं हुआ है। मुख्य सम्मेलन भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के प्रगति मैदान (भारत मंडपम) में होना तय हुआ है लेकिन आपके मन में जो सवाल आ रहा है वह इसलिए क्योंकि इसकी तैयारी और कूटनीतिक बैठकें (Pre-Summit Meetings) देश में बड़े स्तर पर जारी हैं। हाल ही में 14-15 मई 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों (Foreign Ministers) और शेरपाओं की एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। जिसमें मुख्य समिट का एजेंडा तय किया गया। इसके ठीक पहले पिछला मुख्य सम्मेलन (17वां ब्रिक्स समिट) 6-7 जुलाई 2025 को रियो डी जेनेरियो,ब्राजील में संपन्न हुआ था। ब्रिक्स+में कौन-कौन से देश शामिल हैं? वो जाने तो (BRICS Expansion)अब ब्रिक्स केवल 5 देशों का समूह नहीं रहा। इसमें भारी विस्तार हो चुका है। अब मुख्य रूप से 11 स्थायी सदस्य और कई पार्टनर देश इसमें भाग ले रहे हैं। इसमें 11 मुख्य सदस्य देश हैं। पुराने सदस्यों ने भारत,ब्राजील,रूस,चीन और दक्षिण अफ्रीका। नए जुड़े सदस्य (2024-2025 में शामिल) हुएं उसमें मिस्र (Egypt),इथियोपिया,ईरान,संयुक्त अरब अमीरात (UAE),सऊदी अरब और इंडोनेशिया। हालिया बैठकों (मई 2026) में किसने हिस्सा लिया?चूंकि यह विदेश मंत्रियों के स्तर की बैठक थी इसलिए मुख्य शासनाध्यक्षों (जैसे शी जिनपिंग या व्लादिमीर पुतिन) की जगह निम्नलिखित प्रतिनिधि भारत पहुंचे। भारत से विदेश मंत्री डॉ.एस.जयशंकर (मेजबान) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (जिन्होंने मंत्रियों से विशेष मुलाकात की)। रूस से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन से चीनी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि और राजनयिक। इसके अलावा ईरान, यूएई, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ राजनयिकों ने भी इसमें हिस्सा लिया। पार्टनर देश व मेहमान देखें तो मलेशिया, वियतनाम, तुर्की, बेलारूस और थाईलैंड जैसे पार्टनर देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इन बैठकों में अब तक क्या-क्या फैसले और चर्चाएं हुईं?वो जाने तो भारत की अध्यक्षता में चल रही इस कूटनीतिक हलचल में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति और रणनीतियां बनी हैं । ग्लोबल साउथ की आवाज उठाना है। इस साल का मुख्य मोटो जाने तो "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability"है। भारत का मुख्य फोकस विकासशील देशों (Global South) की आर्थिक चिंताओं को दुनिया के सामने मजबूती से रखना है। लोकल करेंसी में व्यापार De-Dollarization रूस और चीन लगातार एक साझा ब्रिक्स करेंसी या लोकल करेंसी (जैसे रुपया,रूबल, युआन) में ट्रेड को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं हालांकि भारत ने अपनी स्थिति साफ रखी है कि वह पूरी तरह से एक नई सिंगल करेंसी के पक्ष में न जाकर द्विपक्षीय व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currency Settlement) के इस्तेमाल को तरजीह देगा। पश्चिम एशिया (West Asia) और व्यापारिक मार्ग देखें तो हाल के समय में लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे तनावों के बाद ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने पर गंभीर रणनीतिक चर्चा की है क्योंकि ईरान और यूएई दोनों अब ब्रिक्स का हिस्सा हैं। ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार देखें तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार करने की मांग को फिर से दोहराया गया ताकि विकासशील देशों को बराबर का प्रतिनिधित्व मिल सके। सप्लाई चेन और एआई (AI) सुरक्षा के मद्देनजर सप्लाई चेन को किसी एक देश (जैसे चीन) पर निर्भर रहने के बजाय सुरक्षित बनाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित उपयोग के लिए एक साझा फ्रेमवर्क बनाने पर चर्चा हुई है। संक्षेप में कहें तो जमीनी स्तर पर बैठकों और फैसलों का दौर जारी है और मुख्य राष्ट्राध्यक्षों की बड़ी बैठक इसी साल सितंबर में नई दिल्ली में देखने को मिलेगी। इसके लिए विकीपीडिया का कहना है कि ब्रिक्स (BRICS) उभरती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के एक संघ का शीर्षक है। इसके घटक राष्ट्र ब्राज़ील, रूस,भारत,चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। इन्हीं देशों के अंग्रेज़ी में नाम के प्रथमाक्षरों B, R, I, C व S से मिलकर इस समूह का यह नामकरण हुआ है। इसकी स्थापना साल 2009 में हुई और इसके 5 सदस्य देश है। मूलत साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल किए जाने से पहले इसे "ब्रिक" के नाम से जाना जाता था। रूस को छोडकर ब्रिक्स के सभी सदस्य विकासशील या नव औद्योगीकृत देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। ये राष्ट्र क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। एक अनुमान के अनुसार ये राष्ट्र संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार में 4 खरब अमेरिकी डॉलर का योगदान करते हैं। इन राष्ट्रों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद 15खरब अमेरिकी डॉलर का है। ब्रिक्स देशों का वैश्विक जीडीपी में 23% का योगदान करता है तथा विश्व व्यापार के लगभग 18% हिस्से में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे R-5 के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इन पांचों देशों की मुद्रा का नाम 'R' से शुरू होता है। 16 जून 2009 में 16 वर्ष पूर्व इस की स्थापना हुई । येकातेरिनबर्ग, रूस प्रकार अंतरराष्ट्रीय संगठन, उद्देश्य देखें तो राजनैतिक एवं आर्थिकक्षेत्र व अंतरराष्ट्रीय राजनीति। इसकी सदस्यता देखें तो ब्राज़ील,रूस,भारत,चीन,दक्षिण अफ़्रीका,मिस्र,  इथियोपिया, ईरान,संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया इसमें शामिल हैं। इसका पूर्व नाम BRIC यानि ब्राजील,रूस,भारत और चीन के संस्थापक देशों ने 2009 में येकातेरिनबर्ग में पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया। जिसके एक साल बाद दक्षिण अफ्रीका इस गुट में शामिल हो गया। ईरान,मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात 1 जनवरी 2024 को संगठन में शामिल हुए। सऊदी अरब अभी तक आधिकारिक तौर पर शामिल नहीं हुआ है लेकिन एक आमंत्रित राष्ट्र के रूप में संगठन की गतिविधियों में भाग लेता है। संयुक्त रूप से ब्रिक्स सदस्य देशों का क्षेत्रफल विश्व के लगभग 30% भूभाग और वैश्विक जनसंख्या का 45% है। दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जबकि ब्राज़ील,भारत और चीन जनसंख्या,क्षेत्रफल और नाममात्र और क्रय शक्ति समता के संदर्भ में विश्व के दस सबसे बड़े देशों में शामिल हैं। पांचों प्रारंभिक सदस्य देश जी 20 के सदस्य हैं। जिनका संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद 28 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 27% वैश्विक सकल उत्पाद) है। कुल सकल घरेलू उत्पाद (क्रय शक्ति समता) लगभग 57 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद क्रय शक्ति समता का 33%) है, और 2018 के अनुसार अनुमानित 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का संयुक्त विदेशी भंडार है। ब्रिक्स देशों को जी7 समूह जिसमें प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। उस का प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। ब्रिक्स देशों ने कई प्रतिस्पर्धी पहलों को लागू किया है। जैसे कि न्यू डेवलपमेंट बैंक,ब्रिक्स कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट,ब्रिक्स पे,ब्रिक्स संयुक्त सांख्यिकीय प्रकाशन और ब्रिक्स बैसक रिजर्व मुद्रा।(Photos Courtesy Social media)

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