*बड़ी खबर..."ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन: इजरायल ने मणिपुर से बनी मेनाशे समुदाय के 250 सदस्यों को भेजा,5000 को लाने का मिशन*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

 *बड़ी खबर..."ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन: इजरायल ने मणिपुर से बनी मेनाशे समुदाय के 250 सदस्यों को भेजा,5000 को लाने का मिशन*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) इजरायल ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर और मिजोरम में रहने वाले ‘बनी मेनाशे’ समुदाय के 250 सदस्यों को वापस अपने देश लाने के लिए"ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन"की शुरुआत की है। 23 अप्रैल गुरुवार को तेल अवीव पहुंचा । यह पहला जत्था इस बड़े मिशन की शुरुआत है। जिसके तहत आगामी साल 2030 तक करीब 5,800 लोगों को इजरायल लाया जाना है। मिशन का नेतृत्व इजरायल के आलिया एवं एकीकरण मंत्रालय और ज्यूइश एजेंसी फॉर इजरायल (JAFI) संयुक्त रूप से कर रहे हैं। तेल अवीव हवाई अड्डे पर आए इन लोगों का पारंपरिक परिधानों में पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। आलिया मंत्री ओफिर सोफर ने स्वागत समारोह में कहा कि यह पूरे समुदाय को इजरायल लाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया है । जिसके तहत हर साल करीब 1,200 लोगों को लाया जाएगा। जाने यह बनी मेनाशे कौन हैं? बनी मेनाशे यानी ‘मेनाशे की संतान’। यह समुदाय खुद को प्राचीन इजरायल की "दस खोई हुई जनजातियों" में से एक मेनाशे कबीले का वंशज मानता है। 722 ईसा पूर्व में असीरियाई साम्राज्य द्वारा निर्वासन के बाद ये लोग ईरान,अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन के रास्ते भारत के पूर्वोत्तर में आकर बस गए थे। मणिपुर में ये मुख्य रूप से कूकी जनजाति के अंतर्गत आते हैं और समुदाय की परंपराओं में अभी भी यहूदी रीति-रिवाज देखे जाते हैं। मणिपुर की हिंसा इसी प्रवासन के मद्देनजर हो रही हैं ऐसा माना जाता है। मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी भीषण जातीय हिंसा इस प्रवासन का एक बड़ा कारण बनी है। तीन साल से चल रही इस हिंसा को विस्थापन का एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। जिसके कारण यह समुदाय अब अपनी सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए इजरायल जाने को प्राथमिकता दे रहा है। अलियाह प्रक्रिया देखें तो 2030 तक का लक्ष्य बीते दो दशकों में लगभग 4,000 से 5,000 बनी मेनाशे पहले ही इजरायल में बस चुके हैं। पिछले साल बेंजामिन नेतन्याहू सरकार द्वारा घोषित इस योजना के तहत 2026 तक अतिरिक्त 1,200 लोगों को लाने का लक्ष्य है। इस वर्ष तीन चरणों में 600 और लोगों के आने की उम्मीद है । जिन्हें शुरू में "नोफ हगालिल" और "किरयात याम"में बसाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया का खर्च लगभग 9 करोड़ शेकेल (करीब 250 करोड़ रुपये) आंका गया है । जो उड़ानों,आवास और हिब्रू प्रशिक्षण पर खर्च किया जाएगा। पूरी दुनिया की नजर इजरायल के ईरान और लेबनान के साथ तनाव पर बनी हुई है। वहीं इन सबके बीच तेल अवीव हजारों किलोमीटर दूर भारत में एक ऑपरेशन चला रहा है। यह मिशन भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से शुरू होता है। जिसका मकसद 5000 लोगों को भारत के मणिपुर से इजरायल भेजना है। इस मिशन का नाम "ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन"रखा गया है। यह मिशन भारत में मौजूद बनी मेनाशे समुदाय के सदस्यों को वापस उनकी जड़ों से जोड़ना है। जो हजारों साल पहले अपने पुरखों के घरों से कट गए थे। बनी मेनाशे को बाइबिल में लॉस्ट ट्राइब (खोई हुई जनजाति) में बताया गया है। इजरायली सरकार ने गुरुवार को दिल्ली के रास्ते बनी मेनाशे समुदाय के 250 सदस्यों का पहला जत्था हवाई जहाज से इजरायल भेजा। बीते साल बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने घोषणा की थी कि वह भारत में मौजूद समुदाय के 4600 सदस्यों को इजरायल भेजेगी। पिछले दो दशकों में 5000 लोग पहले ही इजरायल जा चुके हैं। (Photo Courtesy Social media)

~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √• Metro City Post•Digital. World• #BneiMenashe #OperationWingsOfDawn #Israel #Manipur #Aliyah #LostTribesOfIsrael #ManipurViolence#IndiaIsraelRelations #JewishCommunity #NorthEastIndia

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